PM KUSUM Yojana 2026: किसानों के लिए सोलर पंप पर 60% तक सब्सिडी – पूरी गाइड .

By: Niraj

On: July 20, 2026

PM KUSUM Yojana 2026
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PM KUSUM Yojana (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan) उन सभी किसानों के लिए एक वरदान है, जो खेती के लिए डीजल या बिजली पर निर्भर हैं। सरकार इस योजना के तहत सोलर पंप लगवाने के लिए 60% तक सब्सिडी दे रही है। इसका मतलब है कि एक बार सोलर पंप लग जाने के बाद डीजल या बिजली का रोज का खर्चा खत्म हो जाता है – और अगर अतिरिक्त बिजली बनती है, तो उसे सरकार को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाई जा सकती है। सबसे बड़ी खबर यह है कि 2026 में इसकी डेडलाइन 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है, इसलिए अभी भी आवेदन का मौका है।

इस लेख में हम PM-KUSUM योजना के तीनों घटकों, सब्सिडी की पूरी जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज़ के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Table of Contents

PM-KUSUM Yojana क्या है? (Introduction)

PM KUSUM एक केंद्र सरकार की योजना है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था और 2024 में इसे और बड़ा किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई में मदद करना है, ताकि वे डीजल और बिजली पर अपनी निर्भरता कम कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें

अब तक इस योजना का लाभ 21.77 लाख से अधिक किसान ले चुके हैं। Component B के तहत 10 लाख से ज्यादा सोलर पंप लग चुके हैं। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹34,422 करोड़ का बजट आवंटित किया है

2026 का बड़ा अपडेट: Deadline Extension

पहले इस योजना की समय सीमा 31 मार्च 2026 थी, लेकिन अब MNRE (Ministry of New and Renewable Energy) ने इसे 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला उन परियोजनाओं पर लागू होता है जिनका PPA (Power Purchase Agreement) 31 दिसंबर 2025 तक जारी किया गया था। इसका मतलब है कि जो किसान अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, उनके पास अभी भी पूरा साल बचा है!

अगला फेज PM-KUSUM 2.0 पर भी काम चल रहा है, जिसमें एग्री-फोटोवोल्टिक्स और बैटरी स्टोरेज जैसी नई सुविधाएं शामिल हो सकती हैं

योजना के तीन घटक (Three Components of PM-KUSUM)

PM-KUSUM योजना 3 भागों में बंटी हुई है:

घटक (Component)क्या है?लक्ष्य (Target)
Component Aकिसान अपनी जमीन पर 500 kW से 2 MW तक सोलर पावर प्लांट लगा सकते हैं और बिजली DISCOM को बेच सकते हैं10,000 MW
Component Bस्टैंडअलोन सोलर पंप (जहां ग्रिड कनेक्शन नहीं है)20 लाख पंप
Component Cमौजूदा ग्रिड-कनेक्टेड पंपों को सोलराइज़ करना – अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेची जा सकती है15 लाख पंप

Component B: सबसे ज्यादा लोकप्रिय – स्टैंडअलोन सोलर पंप (60% सब्सिडी!)

अगर आपके खेत में ग्रिड कनेक्शन नहीं है और आप डीजल पंप चला रहे हैं, तो Component B आपके लिए है

कितनी सब्सिडी मिलेगी?

श्रेणीकेंद्र सब्सिडीराज्य सब्सिडीकिसान का हिस्सा
सामान्य राज्य30%30% (न्यूनतम)40% (अधिकतम)
NE states, J&K, HP, उत्तराखंड, Islands50%30%20%
बैंक लोन के साथ30%30%केवल 10% (बाकी लोन)

गुजरात में खास बात: गुजरात सरकार राज्य की तरफ से अतिरिक्त 70% सब्सिडी दे रही है (केंद्र की 30% के अलावा), जिससे आदिवासी और दूरदराज के किसानों को 90% से अधिक सब्सिडी मिल रही है!

कितना फायदा होगा?

  • 5 HP का सोलर पंप लगाने का अनुमानित खर्च: ₹3-4 लाख
  • 60% सब्सिडी मिलने पर किसान को सिर्फ ₹1.2-1.6 लाख ही देने होंगे
  • डीजल पंप पर सालाना ₹60,000-80,000 की बचत होती है
  • मतलब लागत 2 साल से भी कम में निकल जाती है!

Component C: पुराने पंप को सोलर में बदलें और बिजली बेचें!

अगर आपके खेत में पहले से बिजली का पंप लगा है, तो आप Component C के तहत उसे सोलर में बदल सकते हैं

कैसे काम करता है?

  • हाइब्रिड सोलर कंट्रोलर लगाया जाता है, जो दिन में पंप को सोलर से और रात/बादल में ग्रिड से चलाता है
  • अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेची जा सकती है
  • इससे हर महीने बिजली का बिल जीरो हो जाता है!

Component C की सब्सिडी

पंप HPसोलर ऐरेअनुमानित लागतसब्सिडी (30% केंद्र + 30% राज्य)
3 HP3 kW₹1.5-2.0 लाख₹0.9-1.2 लाख
5 HP5 kW₹2.5-3.0 लाख₹1.5-1.8 लाख
7.5 HP7.5 kW₹3.5-4.0 लाख₹2.1-2.4 लाख

Component A: सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेचें और अतिरिक्त आय कमाएं

यह सबसे कम लोकप्रिय हिस्सा है, लेकिन सबसे ज्यादा आय देने वाला है। अभी तक 10,000 MW के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 1,202 MW ही इंस्टॉल हो पाया है

Component A कैसे काम करता है?

  • किसान या किसानों का समूह अपनी बंजर/पड़ताल जमीन पर 500 kW से 2 MW तक सोलर प्लांट लगा सकता है
  • उत्पादित बिजली DISCOM को बेची जाती है (PPA के तहत 25 साल तक)
  • 500 kW प्लांट के लिए 2-2.5 एकड़ जमीन चाहिए
  • 2 MW प्लांट के लिए ~6 एकड़ जमीन चाहिए

Component A की सब्सिडी

श्रेणीCFA (केंद्र सहायता)
सामान्य राज्य₹20 लाख प्रति MW
विशेष राज्य (NE, J&K, HP, UK)₹25 लाख प्रति MW

CFA तीन किस्तों में मिलता है: 30% प्रोजेक्ट अवार्ड पर, 40% इंस्टॉलेशन पर, 30% कमीशनिंग पर

क्यों पिछड़ा है Component A?

  • जमीन जुटाना: छोटे किसानों के लिए 2-6 एकड़ जमीन जुटाना मुश्किल
  • वित्तीय अड़चन: किसानों के लिए बड़ी पूंजी जुटाना मुश्किल
  • ग्रिड इवैकुएशन: बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं

समाधान क्या है?

  • FPO (Farmer Producer Organisation) के माध्यम से जमीन जुटाना
  • RESCO मॉडल: डेवलपर प्लांट लगाए, किसान को जमीन का किराया + बिजली का हिस्सा मिले

Component B के लिए कौन Eligible है?

शर्तविवरण
भारतीय किसानहोना चाहिए
खुद की कृषि जमीनपट्टा / मालिकाना हक होना चाहिए
पानी का स्रोतखेत में बोरवेल, कुआं, नहर हो
ग्रिड कनेक्शन नहींउस खेत पर कोई ग्रिड-कनेक्टेड पंप न हो
प्राथमिकताछोटे (≤2 हेक्टेयर) और सीमांत किसान, SC/ST

किरायेदार किसान (Tenant Farmer) के लिए: आप सीधे आवेदन नहीं कर सकते, लेकिन पंजीकृत पट्टा (10+ साल), संयुक्त पट्टा, FPO सदस्यता, या Component C के माध्यम से लाभ उठा सकते हैं

किरायेदार किसानों के लिए 4 रास्ते (Tenant Farmer Pathways)

अगर आप दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं और आपका पट्टा नहीं है, तो चिंता न करें – 4 रास्ते हैं:

रास्ताकिसके लिए?किरायेदार का हिस्सासब्सिडी
पंजीकृत लंबी अवधि का पट्टा (10+ साल)भूमि मालिक के साथ सहयोग करने वाले किसान30-40%पूरी 60%
संयुक्त पट्टापरिवार की जमीन पर खेती करने वालेप्रति शेयरपूरी B या C
FPO / SHG सहकारीछोटे/सीमांत किरायेदार किसान₹500-5,000FPO 60% लेता है
Component C (भूमि मालिक के माध्यम से)जहां ग्रिड-पंप पहले से है₹0भूमि मालिक को

जरूरी दस्तावेज़ (Documents Required)

दस्तावेज़क्यों जरूरी है?
आधार कार्डपहचान + DBT के लिए
जमीन के दस्तावेज़(7/12 उतारा, खसरा/खतौनी, जमाबंदी) – जमीन का मालिकाना हक साबित करने के लिए
बैंक अकाउंट पासबुकAadhaar-सीडेड होना चाहिए
पासपोर्ट साइज फोटोआवेदन फॉर्म के लिए
जल स्रोत का प्रमाणबोरवेल रिपोर्ट / भूजल विभाग की अनुमति
किरायेदारों के लिए:पंजीकृत पट्टा / NOC / FPO शेयर

आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Process)

Step 1: राज्य नोडल एजेंसी की पहचान करें

राज्यएजेंसीपोर्टल
गुजरातGEDAgeda.gujarat.gov.in
राजस्थानRRECLrrecl.com
मध्य प्रदेशMPRAmprenewable.nic.in
महाराष्ट्रMAHAURJAmahaurja.com
उत्तर प्रदेशUPNEDAupneda.org.in
हरियाणाHAREDAhareda.gov.in

Step 2: पोर्टल पर रजिस्टर करें

अपनी राज्य नोडल एजेंसी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें (मोबाइल + ईमेल)

Step 3: आवेदन फॉर्म भरें

  • किसान की जानकारी
  • जमीन का विवरण (खसरा/खतौनी)
  • पानी के स्रोत की जानकारी
  • पंप की क्षमता (HP) चुनें

Step 4: दस्तावेज़ अपलोड करें

  • आधार, जमीन के दस्तावेज़, बैंक विवरण, फोटो

Step 5: सबमिट करें

फॉर्म सबमिट करें और “Successfully Registered” का मैसेज आने तक प्रतीक्षा करें

Step 6: चयन और डिमांड लेटर

राज्य एजेंसी बैच में आवेदनों की समीक्षा करेगी। चयन होने पर 15-30 दिनों में डिमांड लेटर आएगा

Step 7: किसान का हिस्सा जमा करें

डिमांड लेटर मिलने पर 10-40% राशि (HP के अनुसार) जमा करें

Step 8: वेंडर असाइनमेंट और इंस्टॉलेशन

राज्य एजेंसी एम्पैनल्ड वेंडर असाइन करेगी। 5 HP सिस्टम की इंस्टॉलेशन 3-5 दिनों में हो जाती है

Step 9: निरीक्षण और कमीशनिंग

राज्य एजेंसी का इंस्पेक्टर इंस्टॉलेशन की जांच करेगा (7-15 दिन)

Step 10: सब्सिडी मिलना

कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिलने के बाद सब्सिडी DBT के माध्यम से आपके बैंक खाते में आ जाएगी

गुजरात में खास: गुजरात सालभर आवेदन स्वीकार करता है, जबकि अन्य राज्यों में सालाना विंडो होती है

आवेदन से पहले 7-स्टेप चेकलिस्ट

  1. जमीन का नाम – जमीन के दस्तावेज़ में नाम आधार से बिल्कुल मिलान होना चाहिए
  2. जल स्रोत – बोरवेल/कुआं खेत की सीमा के भीतर हो और चालू हो
  3. ग्रिड कनेक्शन चेक – उस नंबर पर कोई ग्रिड-कनेक्टेड पंप न हो (Component B के लिए)
  4. आधार-बैंक लिंकिंग – NPCI Aadhaar Mapper से चेक करें
  5. राज्य पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन – पहले से कर लें
  6. बेंचमार्क कॉस्ट चेक – MNRE वेबसाइट से नवीनतम लागत देखें
  7. पैसे की तैयारी – डिमांड लेटर आने पर 30 दिनों के भीतर जमा करना है

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. PM KUSUM Yojana में कितनी सब्सिडी मिलती है?

Answer: Component B (नया सोलर पंप) के लिए 60% तक (30% केंद्र + 30% राज्य)। NE और पहाड़ी राज्यों में 70%। बैंक लोन के साथ किसान को सिर्फ 10% देना होता है

Q2. क्या 10वीं पास होना जरूरी है?

Answer: नहीं. PM KUSUM के लिए किसी भी शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है. सिर्फ आप किसान हों और आपकी अपनी जमीन हो

Q3. क्या किरायेदार किसान आवेदन कर सकता है?

Answer: हाँ! 4 रास्ते हैं: पंजीकृत पट्टा (10+ साल), संयुक्त पट्टा, FPO सदस्यता, या भूमि मालिक के माध्यम से Component C

Q4. आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?

Answer: 31 मार्च 2027 तक डेडलाइन बढ़ा दी गई है

Q5. एक्स्ट्रा बिजली बेचकर कितना कमा सकते हैं?

Answer: Component A के तहत आप 25 साल तक DISCOM को बिजली बेच सकते हैं। Component C में अतिरिक्त बिजली बेचकर बिजली बिल जीरो किया जा सकता है

Q6. क्या बैंक लोन मिल सकता है?

Answer: हाँ! PM-KUSUM अब RBI की प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) सूची में है, इसलिए बैंक कम ब्याज पर लोन देते हैं

Q7. क्या Component B का पंप ग्रिड से कनेक्ट होता है?

Answer: नहीं. Component B ऑफ-ग्रिड है – पूरी बिजली पंप में जाती है। ग्रिड से जुड़ने के लिए Component C चुनें

Q8. मुझसे गलती से कोई दस्तावेज़ छूट गया तो क्या होगा?

Answer: अपूर्ण आवेदन रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण हैं। सबमिट करने से पहले हर दस्तावेज़ को तीन बार चेक करें

Apply Now Button Here .

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✅ आपकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी

Conclusion: क्यों PM KUSUM किसानों के लिए गेम-चेंजर है?

PM KUSUM Yojana 2026 भारतीय किसानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। चाहे आप डीजल पंप चलाते हों (Component B), बिजली का पंप लगा हो (Component C), या बंजर जमीन पर सोलर प्लांट लगाना चाहते हों (Component A) – हर किसान के लिए कुछ न कुछ है

आपकी योग्यता के अनुसार क्या करें?

आपकी स्थितिक्या करें?कितनी सब्सिडी?
डीजल पंप चलाते हैं, ग्रिड नहीं हैComponent B – नया सोलर पंप60% (केंद्र+राज्य)
बिजली का पंप लगा हैComponent C – सोलराइज़ करें60% + बिजली बेचें
2+ एकड़ बंजर/पड़ताल जमीनComponent A – सोलर प्लांट₹20-25 लाख/MW
किरायेदार किसान हैंFPO सदस्यता या पट्टासाझेदारी के हिसाब से

आज ही आवेदन करें!

  1. आधिकारिक पोर्टल: pmkusum.mnre.gov.in
  2. राज्य पोर्टल: अपनी राज्य नोडल एजेंसी की वेबसाइट (GEDA, RRECL, UPNEDA, आदि)
  3. महत्वपूर्ण: 31 मार्च 2027 तक डेडलाइन बढ़ी है, लेकिन जितनी जल्दी करेंगे, उतना अच्छा

🇮🇳 किसानों, यह मौका न चूकें – आज ही अपनी पात्रता जांचें और PM KUSUM Yojana का लाभ उठाएं! 

Niraj

I'm Niraj, and I write regularly on government schemes and public policy. My focus is to provide readers with factual information about the schemes of the Government of India and state governments in simple, relatable language. I incorporate official notifications, guidelines, and the latest updates into each article to ensure readers receive accurate information and avoid confusion. I believe that information about government schemes is useful only when it is clear, practical, and grounded in reality. To this end, I strive to explain eligibility, benefits, application procedures, and necessary requirements in a news-like manner, so that the public can benefit from the right scheme at the right time.

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