PM KUSUM Yojana (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan) उन सभी किसानों के लिए एक वरदान है, जो खेती के लिए डीजल या बिजली पर निर्भर हैं। सरकार इस योजना के तहत सोलर पंप लगवाने के लिए 60% तक सब्सिडी दे रही है। इसका मतलब है कि एक बार सोलर पंप लग जाने के बाद डीजल या बिजली का रोज का खर्चा खत्म हो जाता है – और अगर अतिरिक्त बिजली बनती है, तो उसे सरकार को बेचकर अतिरिक्त आय भी कमाई जा सकती है। सबसे बड़ी खबर यह है कि 2026 में इसकी डेडलाइन 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है, इसलिए अभी भी आवेदन का मौका है।
इस लेख में हम PM-KUSUM योजना के तीनों घटकों, सब्सिडी की पूरी जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज़ के बारे में विस्तार से जानेंगे।
PM-KUSUM Yojana क्या है? (Introduction)
PM KUSUM एक केंद्र सरकार की योजना है, जिसे 2019 में शुरू किया गया था और 2024 में इसे और बड़ा किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को सौर ऊर्जा से सिंचाई में मदद करना है, ताकि वे डीजल और बिजली पर अपनी निर्भरता कम कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
अब तक इस योजना का लाभ 21.77 लाख से अधिक किसान ले चुके हैं। Component B के तहत 10 लाख से ज्यादा सोलर पंप लग चुके हैं। केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹34,422 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
2026 का बड़ा अपडेट: Deadline Extension
पहले इस योजना की समय सीमा 31 मार्च 2026 थी, लेकिन अब MNRE (Ministry of New and Renewable Energy) ने इसे 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला उन परियोजनाओं पर लागू होता है जिनका PPA (Power Purchase Agreement) 31 दिसंबर 2025 तक जारी किया गया था। इसका मतलब है कि जो किसान अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, उनके पास अभी भी पूरा साल बचा है!
अगला फेज PM-KUSUM 2.0 पर भी काम चल रहा है, जिसमें एग्री-फोटोवोल्टिक्स और बैटरी स्टोरेज जैसी नई सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
योजना के तीन घटक (Three Components of PM-KUSUM)
PM-KUSUM योजना 3 भागों में बंटी हुई है:
Component B: सबसे ज्यादा लोकप्रिय – स्टैंडअलोन सोलर पंप (60% सब्सिडी!)
अगर आपके खेत में ग्रिड कनेक्शन नहीं है और आप डीजल पंप चला रहे हैं, तो Component B आपके लिए है।
कितनी सब्सिडी मिलेगी?
| श्रेणी | केंद्र सब्सिडी | राज्य सब्सिडी | किसान का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| सामान्य राज्य | 30% | 30% (न्यूनतम) | 40% (अधिकतम) |
| NE states, J&K, HP, उत्तराखंड, Islands | 50% | 30% | 20% |
| बैंक लोन के साथ | 30% | 30% | केवल 10% (बाकी लोन) |
गुजरात में खास बात: गुजरात सरकार राज्य की तरफ से अतिरिक्त 70% सब्सिडी दे रही है (केंद्र की 30% के अलावा), जिससे आदिवासी और दूरदराज के किसानों को 90% से अधिक सब्सिडी मिल रही है!
कितना फायदा होगा?
- 5 HP का सोलर पंप लगाने का अनुमानित खर्च: ₹3-4 लाख
- 60% सब्सिडी मिलने पर किसान को सिर्फ ₹1.2-1.6 लाख ही देने होंगे
- डीजल पंप पर सालाना ₹60,000-80,000 की बचत होती है
- मतलब लागत 2 साल से भी कम में निकल जाती है!
Component C: पुराने पंप को सोलर में बदलें और बिजली बेचें!
अगर आपके खेत में पहले से बिजली का पंप लगा है, तो आप Component C के तहत उसे सोलर में बदल सकते हैं।
कैसे काम करता है?
- हाइब्रिड सोलर कंट्रोलर लगाया जाता है, जो दिन में पंप को सोलर से और रात/बादल में ग्रिड से चलाता है
- अतिरिक्त बिजली DISCOM को बेची जा सकती है
- इससे हर महीने बिजली का बिल जीरो हो जाता है!
Component C की सब्सिडी
| पंप HP | सोलर ऐरे | अनुमानित लागत | सब्सिडी (30% केंद्र + 30% राज्य) |
|---|---|---|---|
| 3 HP | 3 kW | ₹1.5-2.0 लाख | ₹0.9-1.2 लाख |
| 5 HP | 5 kW | ₹2.5-3.0 लाख | ₹1.5-1.8 लाख |
| 7.5 HP | 7.5 kW | ₹3.5-4.0 लाख | ₹2.1-2.4 लाख |
Component A: सोलर प्लांट लगाकर बिजली बेचें और अतिरिक्त आय कमाएं
यह सबसे कम लोकप्रिय हिस्सा है, लेकिन सबसे ज्यादा आय देने वाला है। अभी तक 10,000 MW के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 1,202 MW ही इंस्टॉल हो पाया है।
Component A कैसे काम करता है?
- किसान या किसानों का समूह अपनी बंजर/पड़ताल जमीन पर 500 kW से 2 MW तक सोलर प्लांट लगा सकता है
- उत्पादित बिजली DISCOM को बेची जाती है (PPA के तहत 25 साल तक)
- 500 kW प्लांट के लिए 2-2.5 एकड़ जमीन चाहिए
- 2 MW प्लांट के लिए ~6 एकड़ जमीन चाहिए
Component A की सब्सिडी
CFA तीन किस्तों में मिलता है: 30% प्रोजेक्ट अवार्ड पर, 40% इंस्टॉलेशन पर, 30% कमीशनिंग पर।
क्यों पिछड़ा है Component A?
- जमीन जुटाना: छोटे किसानों के लिए 2-6 एकड़ जमीन जुटाना मुश्किल
- वित्तीय अड़चन: किसानों के लिए बड़ी पूंजी जुटाना मुश्किल
- ग्रिड इवैकुएशन: बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं
समाधान क्या है?
- FPO (Farmer Producer Organisation) के माध्यम से जमीन जुटाना
- RESCO मॉडल: डेवलपर प्लांट लगाए, किसान को जमीन का किराया + बिजली का हिस्सा मिले
Component B के लिए कौन Eligible है?
किरायेदार किसान (Tenant Farmer) के लिए: आप सीधे आवेदन नहीं कर सकते, लेकिन पंजीकृत पट्टा (10+ साल), संयुक्त पट्टा, FPO सदस्यता, या Component C के माध्यम से लाभ उठा सकते हैं।
किरायेदार किसानों के लिए 4 रास्ते (Tenant Farmer Pathways)
अगर आप दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं और आपका पट्टा नहीं है, तो चिंता न करें – 4 रास्ते हैं:
जरूरी दस्तावेज़ (Documents Required)
आवेदन कैसे करें? (Step-by-Step Application Process)
Step 1: राज्य नोडल एजेंसी की पहचान करें
| राज्य | एजेंसी | पोर्टल |
|---|---|---|
| गुजरात | GEDA | geda.gujarat.gov.in |
| राजस्थान | RRECL | rrecl.com |
| मध्य प्रदेश | MPRA | mprenewable.nic.in |
| महाराष्ट्र | MAHAURJA | mahaurja.com |
| उत्तर प्रदेश | UPNEDA | upneda.org.in |
| हरियाणा | HAREDA | hareda.gov.in |
Step 2: पोर्टल पर रजिस्टर करें
अपनी राज्य नोडल एजेंसी के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करें (मोबाइल + ईमेल)
Step 3: आवेदन फॉर्म भरें
Step 4: दस्तावेज़ अपलोड करें
Step 5: सबमिट करें
फॉर्म सबमिट करें और “Successfully Registered” का मैसेज आने तक प्रतीक्षा करें
Step 6: चयन और डिमांड लेटर
राज्य एजेंसी बैच में आवेदनों की समीक्षा करेगी। चयन होने पर 15-30 दिनों में डिमांड लेटर आएगा
Step 7: किसान का हिस्सा जमा करें
डिमांड लेटर मिलने पर 10-40% राशि (HP के अनुसार) जमा करें
Step 8: वेंडर असाइनमेंट और इंस्टॉलेशन
राज्य एजेंसी एम्पैनल्ड वेंडर असाइन करेगी। 5 HP सिस्टम की इंस्टॉलेशन 3-5 दिनों में हो जाती है
Step 9: निरीक्षण और कमीशनिंग
राज्य एजेंसी का इंस्पेक्टर इंस्टॉलेशन की जांच करेगा (7-15 दिन)
Step 10: सब्सिडी मिलना
कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिलने के बाद सब्सिडी DBT के माध्यम से आपके बैंक खाते में आ जाएगी
गुजरात में खास: गुजरात सालभर आवेदन स्वीकार करता है, जबकि अन्य राज्यों में सालाना विंडो होती है।
आवेदन से पहले 7-स्टेप चेकलिस्ट
- जमीन का नाम – जमीन के दस्तावेज़ में नाम आधार से बिल्कुल मिलान होना चाहिए
- जल स्रोत – बोरवेल/कुआं खेत की सीमा के भीतर हो और चालू हो
- ग्रिड कनेक्शन चेक – उस नंबर पर कोई ग्रिड-कनेक्टेड पंप न हो (Component B के लिए)
- आधार-बैंक लिंकिंग – NPCI Aadhaar Mapper से चेक करें
- राज्य पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन – पहले से कर लें
- बेंचमार्क कॉस्ट चेक – MNRE वेबसाइट से नवीनतम लागत देखें
- पैसे की तैयारी – डिमांड लेटर आने पर 30 दिनों के भीतर जमा करना है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. PM KUSUM Yojana में कितनी सब्सिडी मिलती है?
Answer: Component B (नया सोलर पंप) के लिए 60% तक (30% केंद्र + 30% राज्य)। NE और पहाड़ी राज्यों में 70%। बैंक लोन के साथ किसान को सिर्फ 10% देना होता है।
Q2. क्या 10वीं पास होना जरूरी है?
Answer: नहीं. PM KUSUM के लिए किसी भी शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है. सिर्फ आप किसान हों और आपकी अपनी जमीन हो।
Q3. क्या किरायेदार किसान आवेदन कर सकता है?
Answer: हाँ! 4 रास्ते हैं: पंजीकृत पट्टा (10+ साल), संयुक्त पट्टा, FPO सदस्यता, या भूमि मालिक के माध्यम से Component C।
Q4. आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
Answer: 31 मार्च 2027 तक डेडलाइन बढ़ा दी गई है।
Q5. एक्स्ट्रा बिजली बेचकर कितना कमा सकते हैं?
Answer: Component A के तहत आप 25 साल तक DISCOM को बिजली बेच सकते हैं। Component C में अतिरिक्त बिजली बेचकर बिजली बिल जीरो किया जा सकता है।
Q6. क्या बैंक लोन मिल सकता है?
Answer: हाँ! PM-KUSUM अब RBI की प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) सूची में है, इसलिए बैंक कम ब्याज पर लोन देते हैं।
Q7. क्या Component B का पंप ग्रिड से कनेक्ट होता है?
Answer: नहीं. Component B ऑफ-ग्रिड है – पूरी बिजली पंप में जाती है। ग्रिड से जुड़ने के लिए Component C चुनें।
Q8. मुझसे गलती से कोई दस्तावेज़ छूट गया तो क्या होगा?
Answer: अपूर्ण आवेदन रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण हैं। सबमिट करने से पहले हर दस्तावेज़ को तीन बार चेक करें।
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✅ आपकी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी
Conclusion: क्यों PM KUSUM किसानों के लिए गेम-चेंजर है?
PM KUSUM Yojana 2026 भारतीय किसानों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। चाहे आप डीजल पंप चलाते हों (Component B), बिजली का पंप लगा हो (Component C), या बंजर जमीन पर सोलर प्लांट लगाना चाहते हों (Component A) – हर किसान के लिए कुछ न कुछ है।
आपकी योग्यता के अनुसार क्या करें?
आज ही आवेदन करें!
- आधिकारिक पोर्टल: pmkusum.mnre.gov.in
- राज्य पोर्टल: अपनी राज्य नोडल एजेंसी की वेबसाइट (GEDA, RRECL, UPNEDA, आदि)
- महत्वपूर्ण: 31 मार्च 2027 तक डेडलाइन बढ़ी है, लेकिन जितनी जल्दी करेंगे, उतना अच्छा
🇮🇳 किसानों, यह मौका न चूकें – आज ही अपनी पात्रता जांचें और PM KUSUM Yojana का लाभ उठाएं!





